फूल काॅलर पे बस लगाना है


फूल कॉलर पे बस लगाना है 
कितना आसान मुस्कुराना है 

झूलती है कमान पर चिड़िया 
और तरकश में आशियाना है 

पड़ गई है ज़बान उलझन में 
जो छुपाना है वो बताना है 

हम जहाँ हैं वहीं पे मिलते हैं 
जो पता है वही ठिकाना है 

मैं ने पत्थर तो कर लिया ख़ुद को 
अब तिरी राह से हटाना है 
- फ़हमी बदायूनी