धूल
(१) तुम धूल हो— पैरों से रौंदी हुई धूल। बेचैन हवा के साथ उठो, आँधी बन उनकी आँखों में पड़ो जिनके पैरों के नीचे हो। ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ तुम पहुँच न सक...
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आपस में सट कर फूटी कलियाँ एक दूसरे के खिलने के लिए जगह छोड़ देती हैं जगह छोड़ देती हैं गिट्टियाँ आपस में चाहे जितना सटें अपने बीच अपने बराबर जगह ख़ाली...
Read postये आईना बोलने लगा है,मैं जब गुज़रता हूं सीढ़ियों से,ये बातें करता है- आते जाते में पूछता है"कहाॅं गयी वह फतुई तेरी--ये कोट नेक-टाई तुझ पे फबती नहीं,ये...
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थोड़ी-सी ऑक्सीजन और थोड़ी-सी नमी वह छीन लेती है हवा से और पेंट की परत के नीचे छिपकर एक ख़ुफ़िया कार्रवाई की शुरुआत करती है एक दिन अचानक एक पपड़ी छिलके-...
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चाँदनी की पाँच परतें,हर परत अज्ञात हैएक जल में,एक थल में,एक नीलाकाश मेंएक आँखों में तुम्हारे झिलमिलाती,एक मेरे बन रहे विश्वास मेंक्या कहूँ, कैसे कहूँक...
Read postतुमसे अलग होकर लगता हैअचानक मेरे पंख छोटे हो गए हैं,और मैं नीचे एक सीमाहीन सागर में गिरता जा रहा हूँ।अब कहीं कोई यात्रा नहीं है,न अर्थमय, न अर्थहीन;गि...
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तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गई हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गई है जो खचाखच भरा है, कही...
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बस चन्द करोड़ों सालों में सूरज की आग बुझेगी जब और राख उड़ेगी सूरज से जब कोई चाँद न डूबेगा और कोई जमीं न उभरेगी तब ठंढा बुझा इक कोयला सा टुकड़ा ये जमीं...
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आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता कुछ नहीं सोचने और कुछ नहीं बोलने पर आदमी मर जाता है - उदय प्रकाश
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तालिब-ए-शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छै चमचे रहें माइक रहे माला र...
Read postफूल कॉलर पे बस लगाना है कितना आसान मुस्कुराना है झूलती है कमान पर चिड़िया और तरकश में आशियाना है पड़ गई है ज़बान उलझन में जो छुपाना है वो बताना है हम...
Read postवो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान हैमाथे पे उस के चोट का गहरा निशान हैवो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगूमैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान हैसामान कुछ...
Read postजड़ें धरती से जोड़ने की इच्छा,आकाश छूने की इच्छा,बाहें फैलाने की इच्छाऔर हवा के साथ गाने की इच्छा,इस तरह से जन्म लेता हैएक पेड़, एक फूल और फल।यूँ तो ध...
Read postजागती हैं रात भर क्यों,ये भरी आँखें तुम्हारी!क्या कहीं दिन मेंतड़पता स्वप्न देखासुई जैसी चुभ गई क्याहस्त-रेखाबात क्या थीक्यों डरी आँखें तुम्हारी।जागती...
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हम जिएँ न जिएँ दोस्त तुम जियो एक नौजवान की तरह, खेत में झूम रहे धान की तरह, मौत को मार रहे बान की तरह। हम जिएँ न जिएँ दोस्त तुम जियो अजेय इंसान की तरह...
Read postबात सीधी थी पर एक बार भाषा के चक्कर में ज़रा टेढ़ी फँस गई। उसे पाने की कोशिश में भाषा को उलटा पलटा तोड़ा मरोड़ा घुमाया फिराया कि बात या तो बने या फिर भाषा...
Read postGreen Flag for your business
Read postYour website is just like a first date; if it is slow, outdated and confusing ; you might never get a second chance.
Read postIn the fast-paced digital world, having a robust, scalable, and efficient web application is a necessity for any business. Enter Laravel—one of the mo...
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दूर थे और दूर हैं हर दम ज़मीन-ओ-आसमाँ दूरियों के बा'द भी दोनों में क़ुर्बत है तो है
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