फूल काॅलर पे बस लगाना है फूल कॉलर पे बस लगाना है कितना आसान मुस्कुराना है झूलती है कमान पर चिड़िया और तरकश में आशियाना है पड़ गई है ज़बान उलझन में जो छुपाना है वो बताना है हम जहाँ हैं व... Read More →
माइक रहे माला रहे (अदम गोंडवी) तालिब-ए-शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छै चमचे रहें माइक रहे माला रहे - अदम ग... Read More →
मरना आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता कुछ नहीं सोचने और कुछ नहीं बोलने पर आदमी मर जाता है - उदय प्रकाश Read More →
कायनात बस चन्द करोड़ों सालों में सूरज की आग बुझेगी जब और राख उड़ेगी सूरज से जब कोई चाँद न डूबेगा और कोई जमीं न उभरेगी तब ठंढा बुझा इक कोयला सा टुकड़ा ये जमीं का घूमेगा... Read More →
तुम्हारे साथ रहकर तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गई हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गई है जो खचाखच भरा है, कहीं भी एकांत... Read More →
तुमसे अलग होकर तुमसे अलग होकर लगता हैअचानक मेरे पंख छोटे हो गए हैं,और मैं नीचे एक सीमाहीन सागर में गिरता जा रहा हूँ।अब कहीं कोई यात्रा नहीं है,न अर्थमय, न अर्थहीन;गिरने और उठन... Read More →